श्री एस. सिंघा रॉय
निदेशक, तकनीकी-एलडब्ल्यूआर

श्री एस.सिंघा रॉय, जलपाईगुड़ी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियर हैं। वर्ष 1983 में, बीएआरसी प्रशिक्षण विद्यालय के 27वें बैच से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत आपने मद्रास परमाणु बिजलीघर में कार्यभार ग्रहण किया। आप, एमएपीएस इकाई-2 के अनेक न्यूक्लियर व पारंपरिक प्रणालियों की कमीशनिंग से संबद्ध रहे और प्रचालन समूह में कार्यभार ग्रहण कर चौबीस घंटा पारी में प्रचालन संबंधी कार्य करते रहे। तदुपरांत आपको, वरिष्ठ अनुरक्षण अभियंता (एफएचयू) के रूप में पदनामित किया गया और आपको ईंधन हैंडलिंग प्रणाली के महत्वपूर्ण उपकरणों के प्रचालन व अनुरक्षण, प्रणाली सुधार, आयु-सीमा विस्तार का कार्यदायित्व सौंपा गया तथा परिणामस्वरूप प्रणाली के कार्यनिष्पादन में संवर्धन हुआ। वर्ष 2000 में, आपको वरिष्ठ अनुरक्षण अभियंता (यांत्रिकी) के रूप में पदनामित किया गया और अभियांत्रिकीय अनुरक्षण से संबंधित समस्त कार्यकलाप आपके उत्तरदायित्व थे।

 

जनवरी, 2002 में आपने अपर मुख्य् अभियंता के रूप में एन-मास कूलेंट चैनल रिप्लेसमेंट समूह में कार्यभार ग्रहण किया और आपको एमएपीएस- इकाई-।। के एन-मास कूलेंट चैनल रिप्लेसमेंट की योजना, समन्वयन व निष्पादन का दायित्व सौंपा गया। तदुपरांत, आपने अनेक आयु-संवर्धन व संयंत्र उन्नयन कार्यों का निष्पादन किया जिनमें प्राइमरी कूलेंट प्रणाली के फीडर पाइपों का प्रतिस्थापन, एमएपीएस-। के एन-मास कूलेंट चैनल रिप्लेसमेंट, इलेक्ट्रिकल व आई एण्ड सी प्रणालियों का उन्नयन, ब्वायलर हेयर-पिन्सि की बदली, समुद्री वाटर पाइप लाइनों व वाल्वों का व्यापक प्रतिस्थापन, सेकेंडरी प्रणाली पाइपिंग आदि कार्य शामिल हैं।

मद्रास परमाणु बिजलीघर के अनुरक्षण अधीक्षक के रूप में पदनामित किए जाने के पश्चा्त आपको विभिन्न अनुभागों जैसे, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इंस्ट्रूमेंटेशन, फ्यूल हैंडलिंग, सिविल व सेवाएं अनुरक्षण, तथा केंद्र आयोजना अनुभागों में समन्वय संबंधी कार्यों व वानो पिअर रिव्यू में सहभागिता संबंधी कार्यदायित्व, सौंपे गए। इसके साथ ही, आप उपकरणों की अवशेषी आयु के मूल्यांकन के लिए नीति तैयार करने के लिए एनपीसीआईएल द्वारा गठित कार्यबल दल तथा न्यूक्लियर विद्युत संयंत्रों के वानो पिअर रिव्यू के फॉलोअप उपायों की मूल्यांकन समिति, के भी सदस्य रहे।

आपने, जुलाई, 2010 में जैतापुर परियोजना के मुख्य निर्माण अभियंता के रूप में कार्यभार ग्रहण किया और तदुपरांत, दिसंबर 2011 में आपको, जैतापुर स्थल पर 6 X 1650 मेगावाट विद्युत क्षमता वाली ईपीआर इकाइयों की स्थापना को क्रियान्वित करने हेतु, परियोजना निदेशक (जेएनपीपी) के रूप में पदनामित किया गया।

आपने एरेवा/एल्स्टॉम, ईडीएफ फ्रांस के साथ तकनीकी-वाणिज्यिक वार्तालाप करने वाले दल का नेतृत्व किया और साथ ही आप, केकेएनपीपी 3 व 4 की विभिन्न संविदाओं को अंतिम रूप देने व केकेएनपीपी 5 व 6 हेतु प्रस्ताव समीक्षा में भी शामिल रहे हैं।

आपने, आईएईए की अनेक तकनीकी, परामर्श बैठकों, वानो की तकनीकी आदान-प्रदान बैठकों/ कार्यशालाओं में एनपीसीआईएल का प्रतिनिधित्व किया है व साथ ही आप, एईआरबी से संबंधित विनियामक समीक्षाओं से भी जुड़े रहे हैं तथा कोड व दिग्दर्शकों को तैयार करने के सलाहकार समूह से संबद्ध रहे हैं। आप, सारकोप के सदस्य रहे हैं व दाबित भारी पानी रिएक्टरों में कूलेंट चैनलों के आयु प्रबंधन पर गठित सलाहकार समूह के सदस्य व एनपीसी एसआरसी (ओ) के अध्यंक्ष रहे हैं।

आपको, कलपक्कम साइंस एण्ड टेक्नॉलॉजी अवार्ड (1994), एनपीसीआईएल टेक्निकल एक्सीलेंस अवार्ड (1998-99) व इंडियन न्यूक्लियर सोसाइटी- मेडल (2003) से भी सम्मानित किया गया है।

आपको, दिनांक 21 मई, 2016 से, निदेशक (तकनीकी-एलडब्ल्यूआर) के रूप में एनपीसीआईएल निदेशक मंडल में नियुक्त किया गया है।