डॉ. के. के. राजन
निदेशक

डॉ. के. के. राजन, नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी, कालीकट से विद्युत अभियांत्रिकी में स्‍नातक हैं। आपने भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बीएआरसी) प्रशिक्षण विद्यालय के 24वें बैच में वर्ष 1980 को अपना प्रशिक्षण प्राप्‍त किया और न्‍यूक्लियर अभियांत्रिकी के सभी क्षेत्रों में एक वर्ष का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। आपको, वर्ष 1981 में कलपक्‍कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान संस्‍थान में तैनात किया गया और आपको, अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण द्रुत प्रजनक रिएक्‍टर (पीएफबीआर) के कल-पुर्जों के अभिकल्‍पन, विकास व जांच का उत्‍तरदायित्‍व सौंपा गया। कलपक्‍कम में इस द्रुत प्रजनक रिएक्‍टर की कमीशनिंग व सफल प्रचालन में आपकी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण भूमिका रही है।

 

आप, प्रायोगिक द्रुत प्रजनक रिएक्‍टर के परीक्षण से संबंधित महत्‍वपूर्ण कल-पुर्जों जैसे इनक्‍लाइन्‍ड फ्यूल ट्रांसफर मशीन (आईएफटीएम), समरूपित रिएक्‍टर प्रचालन दशाओं में पीएफबीआर की वेसल फ्यूल हैंडलिंग मशीन में ट्रांसफर आर्म (टीए) व प्रमुख सोडियम व वाटर टेस्‍ट सुविधाओं के अभिकल्‍पन, निर्माण, कमीशनिंग के प्रति उत्‍तरदायी रहे हैं। द्रुत प्रजनक रिएक्‍टर की इंस्‍ट्रूमेंटेशन मदों के परीक्षणों में भी आपका बहुमूल्‍य योगदान रहा है। आपके अथक प्रयासों, गहन देख-भाल व पूर्ण सहयोग के कारण स्‍टीम जेनरेट परीक्षण सुविधा के प्रचालन के दौरान आने वाली अनेक कठिनाइयों को दूर किया जा सका और पीएफबीआर स्‍टीम जेनरेटर की एकलयता व निरंतरता को प्रदर्शित किया जा सका।

द्रुत रिएक्‍टर प्रौद्योगिकी समूह के निदेशक के रूप में आपने भविष्‍य के एफबीआर के लिए अनेक अनुसंधान एवं विकास कार्यों, जैसे राडार टाइप सोडियम लेवल सेंसर, समारियम कोबाल्‍ट बेस्‍ड परमानेंट मैगनेट फ्लो मीटर, इंटीग्रेटेड कोल्‍ड ट्रैप, भविष्‍य के एफबीआर के लिए पूल सोडियम शुद्धिकरण की नवीन अवधारणा, एफबीआर का सेकेंडरी कोल्‍ड र्टैप, सोडियम एअरोसोल डिस्‍परसन का वातावरण में अध्‍ययन व पीएफबीआर के सेफ्टी ग्रेड क्षयी ऊष्‍मा निष्‍कासन प्रणाली (एसजीडीएचआर) आदि का नेतृत्‍व किया है। आप, पीएफबीआर के लिए आवश्‍यक 1700 टन सोडियम की प्राप्ति व इसे भंडारण सुविधाओं तक पहुंचाने के लिए गठित कार्यबल के सह-संयोजक रहे हैं। आपके ज्ञान, अनुभव व शानदार संयोजन क्षमताओं को देखते हुए आपको आईजीसीएआर में अभियंत्रण सेवाएं समूह के निदेशक का अतिरिक्‍त कार्यदायित्‍व सौंपा गया।

आपको, ‘‘कंपैक्‍ट इलेक्‍ट्रोमैगनेटिक फ्लो मीटर्स विद इनहैंस सेंसिविटी फॉर फ्लो मेसरमेंट इन सोडियम सर्किट्स’’ के लिए होमी भाभा राष्‍ट्रीय संस्‍थान (एचबीएनआई) द्वारा पीएचडी की उपाधि से सम्‍मानित किया गया। दिनांक 30 अप्रैल, 2016 को सेवानिवृत्ति के समय आप उत्‍कृष्‍ट वैज्ञानिक के रूप में कार्यरत रहे। आप, इंडियन न्‍यूक्लियर सोसाइटी, इंस्‍ट्रूमेंट सोसाइटी ऑफ इंडिया के सदस्‍य व इंस्‍टीट्यूट ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के फेलो सदस्‍य हैं। राष्‍ट्रीय व अंतरराष्‍ट्रीय जरनलों में आपके 140 से अधिक प्रकाशन निकल चुके हैं। आप, वर्तमान में विश्‍वज्‍योति कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एण्‍ड टेक्‍नोलोजी, मुवाथापुषा, केरल में प्रोफेसर, ईईई विभाग, नोडल अधिकारी, नवप्रर्वतक एवं नव-उद्यमी विकास प्रकोष्‍ठ तथा डीन, इंडस्‍ट्री-इंस्‍टीट्यूट पारस्‍परिक संपर्क प्रकोष्‍ठ के रूप में कार्यरत हैं।