संजय कुमार
निदेशक, (तकनीकी- साधारण जल रिएक्टर)

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के प्रशिक्षण विधालय के 29वें बैच से प्रशिक्षित श्री संजय कुमार एक मेकैनिकल इंजीनियर हैं। एक वर्ष के प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण कर लेने के उपरांत आपने अगस्त, 1986 में नरौरा परमाणु बिजलीघर में कार्यग्रहण किया।

12 मार्च, 2020 को निदेशक (तकनीकी- साधारण जल रिएक्टर) के रूप में कार्यग्रहण से पूर्व श्री संजय कुमार ने एनपीसीआईएल में पिछले 34 वर्षों की अपनी सेवा के दौरान एनपीसीआईएल के सात स्थलों में से पाँच में विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए न्यूक्लियर पावर बोर्ड और एनपीसीआईएल के कार्यक्रमों व इसकी प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आपने नपबिघ- 1 व 2, रापबिघ- 3 व 4 की कमीशनिंग हेतु कार्य किया और तत्पश्चात इनका प्रचालन किया तथा रापबिघ-6 की कमीशनिंग एवं प्रथम क्रांतिकता का कार्य किया। आपने कापबिघ-1 व 2 के तकनीकी सेवा अधीक्षक, केजीएस- 3 व 4 के मुख्य अधीक्षक, केजीएस- 1 व 2 के केंद्र निदेशक तथा केजीएस, कैगा और केकेएनपीपी, कुडनकलम के स्थल निदेशक के पदों पर अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।

आप, ऐसे कई दलों के या तो प्रमुख रहे हैं या महत्वपूर्ण सदस्य रहे हैं, जिन्होंने एनपीसीआईएल में पहली बार आयोजित होने वाली गतिविधियों को अंजाम दिया जो बाद में परंपराएं बन गई। रापबिघ – 3 में अनुरक्षण हेतु प्रारंभिक विधुत प्रचालन के दौरान पीएचटी हैडर ड्रेनिंग, रापबिघ – 3 में डी एन एम सैंपलिंग हैडर प्रतिस्थापन जिसमें सभी वेल्ड ज्वाइंट्स को परिनियोजित किया गया, रापबिघ- 3 व 4 में हैडर स्तर नियंत्रण के दौरान पीएचटी प्रणाली में एंटिमनी नियंत्रण उपाय तैयार कर उनका कार्यान्वयन, फीडर कैनल में किए गए अनुरक्षण के कारण मोतीचेर झील में बिना जल प्रवाह के कापबिघ इकाई का प्रचालन, कापबिघ- 1 में ईएमसीसीआर शटडाउन के दौरान – अनुरक्षण हेतु सप्रेशन पूल का पूर्ण जल अपवाह, कैलेंड्रिया वॉल्ट लीक की मरम्मत, अनुरक्षण हेतु कैलेंड्रिया का पूर्ण अपवाह, पूर्ण विधुत पर प्रचालन के दौरान सीटीएम हाई अलार्म समस्या के निपटान के लिए पीएचटी फीडर की रिसाइजिंग, बीसीडी अस्थायी मॉनीटरन योजना में संशोधन, संरक्षा एवं संरक्षा संबंधी प्रणालियों में डिजाइन संबंधी प्रमुख उन्नयन इत्यादि ऐसे कुछ कार्य हैं। कापबिघ में आपके उत्कृष्ट योगदान के सम्मान में आपको वर्ष 2011 में एनपीसीआईएल उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

केजीएस- 1 व 2 के केंद्र निेदशक तथा कैगा स्थल के स्थल निदेशक के रूप में वर्ष 2012 से 2018 तक आपके कार्यकाल के दौरान, कैगा- 1 ने 99.25% के क्षमता गुणांक पर 962 दिवसों के अनवरत प्रचालन का विश्व रिकॉर्ड बनाया, जिसने ब्रिटिश गैस शीतलित रिएक्टर हेयशम के 942 दिवसों के अनवरत प्रचालन के विश्व रिकॉर्ड को तोड़ा, इसके बाद इकाई को बीएसडी कार्यों के लिए नियोजित रूप से शटडाउन कर दिया गया। इसी अवधि के दौरान केजीएस-2 ने भी 692 दिवसों का अनवरत प्रचालन दर्ज करते हुए अपना खुद का अनवरत प्रचालन का रिकॉर्ड तोड़ा।

केजीएस-1 के अनवरत प्रचालन में आपके उत्कृष्ट योगदान के लिए आपको वर्ष 2018 में एनपीसीआईएल समूह उपलब्धि पुरस्कार (समूह प्रमुख) से सम्मानित किया गया। आपके कार्यकाल के दौरान, वर्ष दर वर्ष केजीएस बिजलीघरों को सर्वोत्तम या द्वितीय सर्वोत्तम बेंच मार्क वाले एनपीसीआईएल बिजलीघरों के रूप में आंका जाता रहा, जिन्होंने डीजीएफएएसएलआई से अग्नि एवं औगिक संरक्षा पुरस्कार तथा साथ ही राष्ट्रीय संरक्षा पुरस्कार, राष्ट्रीय संरक्षा परिषद पुरस्कार, परमाणु ऊर्जा नियामक परिषद अग्नि एवं औगिक संरक्षा पुरस्कार, एनएससी कर्नाटक चैप्टर संरक्षा पुरस्कार इत्यादि अर्जित किए।

बिजलीघर एवं स्थल प्रबंधन के अपने व्यापक अनुभव की बदौलत नवंबर, 2018 से मार्च, 2020 तक कुडनकुलम स्थल के स्थल निदेशक के रूप में आपने केकेएनपीपी- 1 व 2 इकाइयों के कार्यनिष्पादन में वृद्धि के लिए कार्य किया। केकेएनपीपी-1 की आयातित टीजी के बियरिंग्स और जर्नलों की क्षति के बाद रूसी एवं भारतीय विशेषज्ञों के साथ सूक्ष्म स्तरीय योजनाओं, समय-बद्धता, निविदाकरण एवं लगातार अनुसरण के कारण दीर्घ अनुरक्षण का एक चुनौतीपूर्ण कार्य स्वदेशी रूप से न्यूनतम समय में पूर्ण कर लिया गया। इसी प्रकार 2019-20 में केकेएनपीपी इकाई-2 के जनित्र स्टैटर, आरएसडी को 90 दिवसों की न्यूनतमक रिकॉर्ड अवधि में प्रतिस्थापित किया गया जिसके कारण केकेएनपीपी-2 का पूर्ण विुत पर प्रचालन संभव हुआ। 2019-20 से केकेएनपीपी- 1 व 2 के कार्यनिष्पादन में महत्वपूर्ण वृद्धि हासिल की गई है जो एनपीसीआईएल के समग्र कार्यनिष्पादन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

श्री संजय कुमार ने दिनांक 12 मार्च, 2020 को निदेशक (तकनीकी- साधारण जल रिएक्टर) के रूप में पदभार ग्रहण किया।