सामान्‍य रूपरेखा :

एनपीसीआईएल न्‍यूक्लियर विद्युत रिएक्‍टरों के अभिकल्‍पन, निर्माण, कमीशनिंग, प्रचालन और उन्‍नयन कार्यों में रत है। न्‍यूक्लियर विद्युत रिएक्‍टरों के सभी पहलुओं में संरक्षा को सर्वोच्‍च प्राथमिकता दी जाती है। वर्तमान में एनपीसीआईएल 7480 मेगावाट की संस्‍थापित क्षमता के साथ 23 न्‍यूक्लियर विद्युत रिएक्‍टरों (राजस्‍थान परमाणु बिजलीघर इकाई-1, 100 मेगावाट दाभापारिएक्‍टर सहित जिसका स्‍वामित्‍व परमाणु ऊर्जा विभाग के पास है, प्रबंधन एनपीसीआईएल द्वारा किया जाता है और जो दीर्घकालिक शटडाउन में है) का प्रचालन कर रहा है। वर्तमान में एनपीसीआईएल नौ रिएक्‍टरों (7500 मेगावाट) - काकरापार परमाणु विद्युत परियोजना (केएपीपी) इकाई-4 (700 मेगावाट, दाभापारिएक्‍टर), राजस्‍थान परमाणु विद्युत परियोजना (आरएपीपी) इकाई-7व8 (2x700 मेगावाट, दाभापारिएक्‍टर), केकेएनपीपी-3व4 (2x1000 मेगावाट, साजरिएक्‍टर) एवं केकेएनपीपी-5व6 (2x1000 मेगावाट, साजरिएक्‍टर) का निर्माण कर रहा है एवं गोरखपुर हरियाणा अणु विद्युत परियोजना (जीएचएवीपी) इकाइयां - 1 व 2 (2x700 मेगावाट पीएचडब्ल्यूआर) जो निर्माण के विभिन्‍न चरणों में हैं।। फ्लीट मोड में 700 मेगावाट के 10 दाभापारिएक्‍टरों के संबंध में भारत सरकार से प्रशासनिक अनुमोदन एवं वित्‍तीय मंजूरी प्राप्‍त कर लेने के पश्‍चात् विभिन्‍न प्रारंभिक गतिविधियां जैसे भूमि अर्जन व पुनर्वास एवं पुनर्स्‍थापन, पर्यावरणीय अनुमति, दीर्घकालिक सुपुर्दगी उपस्‍करों की प्रापण गतिविधियां, नियामक अनुमतियों के लिए अध्‍ययन, स्‍थल आधारभूत संरचनात्‍मक विकास, जनसंपर्क, मुख्‍य संयंत्र सिविल कार्य के लिए निविदा जारी करना इत्‍यादि प्रगति के विभिन्‍न चरणों में हैं। उपर्युक्‍त परियोजना इकाइयों के क्रमवार पूरे हो जाने पर 2031 तक एनपीसीआईएल की कुल संस्‍थापित क्षमता 21980 मेगावाट तक पहुँचना प्रत्‍याशित है।

महाराष्‍ट्र में जैतापुर स्‍थल और आंध्रप्रदेश में कोव्‍वाड़ा स्‍थल के लिए अंतरराष्‍ट्रीय सहयोग पर आधारित बृहद आकार के आयातित साधारण जल रिएक्‍टर (एलडब्‍ल्‍यूआर) स्‍थापित करने के लिए स्‍थल आधारभूत संरचनात्‍मक विकास, नियामक अनुमतियां, जनसंपर्क इत्‍यादि एवं विभिन्‍न तकनीकी वाणिज्यिक विमर्श प्रगति पर हैं।